सजीव जगत में विविधता – Class 6 Science Jigyasa Chapter 2 Notes.
इस पोस्ट में कक्षा 6 विज्ञान (Jigyasa) अध्याय 2 – सजीव जगत में विविधता के पूरे टॉपिक को आसान भाषा में, टॉपर नोट्स के फॉर्मेट में समझाया गया है। ये नोट्स रिवीजन और परीक्षा की तैयारी दोनों के लिए उपयोगी हैं। इसमें आप जैव विविधता, पौधों और जंतुओं का समूहन, शिरा-विन्यास, जड़ों के प्रकार, बीजपत्र, अनुकूलन, आवास और जैव विविधता के संरक्षण के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे।
इस पोस्ट में क्या-क्या है (Table of Contents)
- 1. जैव विविधता क्या है?
- 2. पौधों और जंतुओं के समूह कैसे बनाएँ?
- 3. पौधों के समूह – शाक, झाड़ी और वृक्ष
- 4. पत्तियों का शिरा-विन्यास
- 5. जड़ों के प्रकार
- 6. बीज और बीजपत्र (एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री)
- 7. जंतुओं के समूह – गति के आधार पर
- 8. विभिन्न परिवेश में पौधे और जंतु
- 9. अनुकूलन (Adaptation)
- 10. आवास (Habitat)
- 11. जैव विविधता का संरक्षण
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. जैव विविधता क्या है?
परिभाषा: किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले पौधों और जंतुओं की विविधता उस क्षेत्र की जैव विविधता का भाग होती है।
- जैव विविधता में प्रत्येक सदस्य की एक अलग भूमिका होती है — जैसे पेड़ कुछ पक्षियों और जंतुओं को भोजन और आश्रय प्रदान करते हैं, जंतु फल खाने के बाद बीज फैलाने में सहायता करते हैं।
- इससे पता चलता है कि पौधे और जंतु एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं।
2. पौधों और जंतुओं के समूह कैसे बनाएँ?
परिभाषा: पौधों और जंतुओं को उनकी सामान्य विशेषताओं के आधार पर समूहों में व्यवस्थित करने की विधि को समूहन कहा जाता है।
- समूह बनाने से पौधों और जंतुओं को उनकी समानताओं और भिन्नताओं के आधार पर समझना और अध्ययन करना सरल हो जाता है।
- समूह बनाने के कुछ संभावित आधार — फूलों की उपस्थिति या अनुपस्थिति, कठोर या कोमल तना, खान-पान का स्वभाव, रहने का स्थान।
- अलग-अलग विद्यार्थी अलग-अलग सामान्य विशेषताओं के आधार पर भिन्न-भिन्न समूह बना सकते हैं।
3. पौधों के समूह – शाक, झाड़ी और वृक्ष
ऊँचाई और तने के प्रकार के आधार पर पौधों को तीन समूहों में बाँटा जाता है:
| पादप समूह | विशेषताएँ | उदाहरण |
|---|---|---|
| वृक्ष | ऊँचे पौधे; तने मोटे, कठोर, भूरे और काष्ठीय (लकड़ी जैसे); शाखाएँ तने की कुछ ऊँचाई से निकलती हैं | आम |
| झाड़ी | मध्यम ऊँचाई; तने कठोर पर वृक्ष जितने मोटे नहीं; शाखाएँ भूमि के निकट से निकलती हैं | गुलाब |
| शाक | छोटे आकार के पौधे; तने कोमल और हरे | टमाटर |
अन्य प्रकार के पौधे:
- आरोही लता (क्लाइम्बर): तने दुर्बल होते हैं, ऊपर चढ़ने और बढ़ने के लिए सहारे की आवश्यकता होती है।
- विसर्पी लता (क्रीपर): भूमि की सतह पर फैलकर बढ़ने वाले पौधे।

4. पत्तियों का शिरा-विन्यास
परिभाषा: पत्तियों पर मौजूद पतली रेखाओं को शिराएँ कहते हैं। शिराओं द्वारा दर्शाए गए पैटर्न को शिरा-विन्यास कहा जाता है।
- जालिकारूपी शिरा-विन्यास: मोटी मध्य शिरा के दोनों ओर शिराओं का जाल जैसा पैटर्न — उदाहरण: गुड़हल की पत्ती।
- समांतर शिरा-विन्यास: शिराएँ समानांतर चलती हैं — उदाहरण: केले और घास की पत्ती।

5. जड़ों के प्रकार
- मूसला जड़: एक मुख्य जड़ होती है जिससे छोटी-छोटी पार्श्व जड़ें निकलती हैं — उदाहरण: सरसों, गुड़हल।
- झकड़ा (रेशेदार) जड़: समान माप की पतली जड़ों के गुच्छे के रूप में, जो तने के आधार से निकलती हैं — उदाहरण: सामान्य घास।
शिरा-विन्यास और जड़ के प्रकार में संबंध: जिन पौधों में जालिकारूपी शिरा-विन्यास होता है, उनमें प्रायः मूसला जड़ें होती हैं; जिनमें समांतर शिरा-विन्यास होता है, उनमें झकड़ा जड़ें होती हैं। उदाहरण — चने का पौधा: मूसला जड़ + जालिकारूपी शिरा-विन्यास; गेहूँ का पौधा: झकड़ा जड़ + समांतर शिरा-विन्यास।

6. बीज और बीजपत्र (एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री)
परिभाषा: बीज के आवरण के अंदर के प्रत्येक भाग को बीजपत्र (कॉटीलीडन) कहा जाता है।
| समूह | बीजपत्रों की संख्या | शिरा-विन्यास | जड़ का प्रकार | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| द्विबीजपत्री (डाइकॉट) | दो बीजपत्र | जालिकारूपी | मूसला जड़तंत्र | चना |
| एकबीजपत्री (मोनोकॉट) | एक बीजपत्र | समांतर | झकड़ा जड़तंत्र | मक्का |

7. जंतुओं के समूह – गति के आधार पर
विभिन्न जंतुओं में अलग-अलग प्रकार की गति होती है — जंतु उड़ सकते हैं, दौड़ सकते हैं, रेंग सकते हैं, चल सकते हैं, कूद या फाँद सकते हैं।
| जंतु | गति का प्रकार | गति के लिए प्रयुक्त अंग |
|---|---|---|
| चींटी | चलना | टाँगें |
| बकरी | चलना और कूदना | टाँगें |
| कबूतर | चलना और उड़ना | पैर और पंख |
| मक्खी | चलना और उड़ना | पैर और पंख |
| मछली | तैरना | पख (फिन) |
8. विभिन्न परिवेश में पौधे और जंतु
जंतुओं की गति और पौधों की संरचना उनके परिवेश पर निर्भर करती है।
- मछली: जल में रहती है; जल में गति करने के लिए इसका शरीर धारारेखित (स्ट्रीमलाइन्ड) होता है और इसमें पख (फिन) होते हैं।
- बकरी: घास वाले क्षेत्र में रहती है और टाँगों की सहायता से चलती है।
9. अनुकूलन (Adaptation)
परिभाषा: वे विशिष्ट विशेषताएँ, जो पौधों और जंतुओं को किसी विशेष क्षेत्र में जीवित रहने के लिए सक्षम बनाती हैं, अनुकूलन कहलाती हैं।
मरुस्थलीय क्षेत्र के अनुकूलन
- नागफनी: मोटे और मांसल तने जल संग्रहित कर सकते हैं, जो गरम परिस्थितियों को सहन करने में सहायक होते हैं।
पर्वतीय क्षेत्र के अनुकूलन
- देवदार: शंक्वाकार आकृति और नीचे झुकी हुई शाखाएँ — जिनसे बर्फ टिकती नहीं, आसानी से फिसल जाती है।
- बुरांस (रोडोडेंड्रॉन): कम ऊँचाई और छोटे पत्ते — जिससे यह पहाड़ की चोटियों पर तेज हवाओं में जीवित रह सके। भिन्न-भिन्न क्षेत्रों (जैसे नीलगिरी और सिक्किम) में बुरांस के पौधे भिन्न ऊँचाई प्रदर्शित कर सकते हैं।
ऊँट में अनुकूलन (गरम बनाम ठंडे मरुस्थल की तुलना)
| विशेषता | गरम मरुस्थल का ऊँट (राजस्थान) | ठंडे मरुस्थल का ऊँट (लद्दाख) |
|---|---|---|
| पैर व खुर | लंबे पैर, चौड़े खुर — रेत में बिना धँसे चलने में सहायक | छोटे पैर — ठंडे पहाड़ी मरुस्थलीय क्षेत्र में चलने में सक्षम |
| कूबड़ | एक कूबड़ — भोजन की कमी में जीवित रहने में सहायक | दो कूबड़ — सर्दियों के अंत तक छोटे हो जाते हैं |
| बाल | — | सिर से गर्दन के निचले भाग तक लंबे बाल — बर्फीले मौसम में सहायक |
- अन्य अनुकूलन: ऊँट कम मात्रा में मूत्र विसर्जन करते हैं, इनका गोबर सूखा होता है और इन्हें पसीना नहीं आता — जिससे शरीर से पानी की हानि कम होती है और ये बिना जल पिए भी कई दिनों तक जीवित रह सकते हैं।
- व्हेल और मछलियाँ: महासागर में पाई जाती हैं; मछलियों का धारारेखित शरीर उन्हें जल में तैरने में सहायता करता है।
10. आवास (Habitat)
परिभाषा: वह स्थान जहाँ पौधे और जंतु रहते हैं, उसे उनका आवास कहते हैं।
| आवास का प्रकार | विवरण | उदाहरण |
|---|---|---|
| थलीय आवास | थल पर रहने वाले पौधों और जंतुओं का आवास | वन, घास के मैदान, मरुस्थल, पर्वतीय क्षेत्र |
| जलीय आवास | जल में रहने वाले पौधों और जंतुओं का आवास | तालाब, झील, नदियाँ, महासागर |
- उभयचर जंतु: मेंढक जैसे कुछ जंतु जल के साथ-साथ थल पर भी रह सकते हैं, इन्हें उभयचर जंतु कहते हैं।
आवास का महत्व
- आवास पौधों और जंतुओं को जीवित रहने के लिए भोजन, जल, वायु, आश्रय और अन्य आवश्यकताएँ प्रदान करता है।
- कई प्रकार के पौधे और जंतु एक ही आवास में रह सकते हैं। आवास किसी क्षेत्र की जैव विविधता को निर्मित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- आवास नष्ट होने पर पौधे और जंतु अपने घर, भोजन और अन्य संसाधनों से वंचित हो जाते हैं, जिससे जैव विविधता की हानि होती है।
11. जैव विविधता का संरक्षण
भारत में बंगाल बाघ, चीता और गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) की संख्या मानवीय गतिविधियों द्वारा हुई उनके आवासीय क्षति के कारण घट गई है। भारत सरकार ने जैव विविधता के संरक्षण के लिए अनेक परियोजनाएँ आरंभ की हैं:
- बाघ परियोजना (प्रोजेक्ट टाइगर): 1973 में बंगाल टाइगर की घटती संख्या के संरक्षण के लिए आरंभ की गई।
- चीता पुनर्वास परियोजना: 2022 में चीता की संख्या को पुनःस्थापित करने के लिए आरंभ की गई।
- गोडावण संरक्षण: गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र राज्यों में गोडावण के आवासों को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है।
पवित्र उपवन (सेक्रेड ग्रोव्स)
पवित्र उपवन परंपरागत रूप से संरक्षित, अबाधित वन क्षेत्र हैं जो पूरे भारत में पाए जाते हैं। ये कई औषधीय पौधों समेत विविध प्रकार के पौधों और जंतुओं का घर हैं। इनका संरक्षण स्थानीय समुदाय द्वारा किया जाता है, और यहाँ किसी को भी किसी जीव-जंतु को हानि पहुँचाने, पेड़ काटने या क्षेत्र को क्षति पहुँचाने की अनुमति नहीं है।
सफलता की कहानी — साइलेंट वैली बचाओ आंदोलन
यह केरल में पालक्काड़ जनपद के एक अछूते, सुंदर आर्द्र सदाबहार जंगल की जैव विविधता को संरक्षित करने की कहानी है। कुंतिपुड़ा नदी के समीप प्रस्तावित जलविद्युत बाँध के विरुद्ध यह आंदोलन दस वर्षों तक चला। लोगों ने जागरूकता कार्यक्रम, संपादक को पत्र, समाचार-पत्रों में लेख, सेमिनार और न्यायालय में याचिकाओं जैसे साधनों का उपयोग किया, जिससे साइलेंट वैली को बचाने में सफलता मिली।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
जैव विविधता किसे कहते हैं?
किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले पौधों और जंतुओं की विविधता उस क्षेत्र की जैव विविधता कहलाती है।
मूसला जड़ और झकड़ा जड़ में क्या अंतर है?
मूसला जड़ में एक मुख्य जड़ होती है जिससे छोटी पार्श्व जड़ें निकलती हैं (जैसे सरसों), जबकि झकड़ा जड़ में समान माप की पतली जड़ों का गुच्छा तने के आधार से निकलता है (जैसे घास)।
एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री पौधों में क्या अंतर है?
द्विबीजपत्री पौधों (जैसे चना) में दो बीजपत्र, जालिकारूपी शिरा-विन्यास और मूसला जड़तंत्र होता है, जबकि एकबीजपत्री पौधों (जैसे मक्का) में एक बीजपत्र, समांतर शिरा-विन्यास और झकड़ा जड़तंत्र होता है।
अनुकूलन किसे कहते हैं?
वे विशिष्ट विशेषताएँ, जो पौधों और जंतुओं को किसी विशेष क्षेत्र में जीवित रहने के लिए सक्षम बनाती हैं, अनुकूलन कहलाती हैं — जैसे ऊँट का कूबड़ या नागफनी का मांसल तना।
थलीय आवास और जलीय आवास में क्या अंतर है?
थल पर रहने वाले पौधों और जंतुओं के आवास को थलीय आवास कहते हैं (जैसे वन, मरुस्थल), जबकि जल में रहने वाले पौधों और जंतुओं के आवास को जलीय आवास कहते हैं (जैसे तालाब, महासागर)।
Here is the full pdf of सजीव जगत में विविधता – Class 6 Science Jigyasa Chapter 2 Notes below.
Watch this chapter complete line by line by Ayaan Sir, Class 6 Science Jigyasa chapter 2 in Hindi. click here: https://youtu.be/wAGu-LIk2k8?si=2T5bNPAyIgCFPGHt
Download Notes for free here: https://t.me/proteensacademy